नमस्ते, मैं डॉ. सर्वेश गुप्ता,
पिछले वर्ष हमने ‘पिंक अक्टूबर’ के दौरान स्तन कैंसर पर विस्तार से चर्चा की और कमला नेहरू मेमोरियल हॉस्पिटल (KNMH) के मंच से जागरूकता की एक मशाल जलाई। लेकिन कैंसर के विरुद्ध हमारी यह लड़ाई केवल एक अंग या एक महीने तक सीमित नहीं है।
आज मैं आपका ध्यान एक ऐसी बीमारी की ओर खींचना चाहता हूँ जो दबे पाँव हमारी युवा पीढ़ी, विशेषकर 40 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं को अपना निशाना बना रही है— ओवेरियन कैंसर (Ovarian Cancer)।
अक्सर समाज में यह धारणा होती है कि अंडाशय का कैंसर केवल मेनोपॉज के बाद या बड़ी उम्र में होता है। लेकिन एक ऑन्कोलॉजिस्ट के रूप में, मैं अपने क्लिनिक में ऐसी युवतियों को देख रहा हूँ जिनकी उम्र अभी केवल 25 या 30 वर्ष है।
क्यों बढ़ रहा है युवा महिलाओं में खतरा?
ओवेरियन कैंसर के मामले युवाओं में बढ़ने के पीछे कई वैज्ञानिक और जीवनशैली से जुड़े कारण हैं:
- जेनेटिक म्यूटेशन (BRCA1 और BRCA2): यदि आपके परिवार में किसी को स्तन या ओवेरियन कैंसर रहा है, तो आपमें इसका खतरा अधिक हो सकता है। BRCA म्यूटेशन या लिंच सिंड्रोम जैसे वंशानुगत कारण युवा महिलाओं में इसके मुख्य कारक हैं।
- बदलती जीवनशैली और तनाव: शहरी जीवन का अत्यधिक तनाव, बिगड़ती डाइट और शारीरिक सक्रियता की कमी शरीर में क्रोनिक इन्फ्लेमेशन (सूजन) पैदा करती है, जो कैंसर कोशिकाओं को पनपने में मदद कर सकती है।
- जागरूकता और स्क्रीनिंग का अभाव: स्तन कैंसर के लिए तो फिर भी मैमोग्राफी मौजूद है, लेकिन ओवेरियन कैंसर के लिए फिलहाल कोई वैश्विक मानक ‘स्क्रीनिंग टेस्ट’ नहीं है। इसकी पहचान केवल सतर्कता से ही संभव है।
सावधान! इन ‘साधारण’ लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें
ओवेरियन कैंसर खतरनाक इसलिए है क्योंकि इसके लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि महिलाएं इन्हें गैस, एसिडिटी या पीरियड्स की समस्या समझकर टाल देती हैं।
*स्रोतः डॉ. सर्वेश गुप्ता, जीवन आशा क्लिनिक, प्रयागराज
मानसिक स्वास्थ्य और फर्टिलिटी : एक अनकही चुनौती
जब एक 30 साल की महिला को कैंसर का पता चलता है, तो उसकी लड़ाई सिर्फ शारीरिक नहीं रह जाती। वह मानसिक रूप से टूट जाती है। उसके मन में कई सवाल होते हैं:
- “क्या मैं कभी माँ बन पाऊँगी?”
- “क्या कीमोथेरेपी मेरी पहचान छीन लेगी?”
- “समाज और परिवार को मैं यह कैसे समझाऊँगी?”
जीवन आशा क्लिनिक में हमारा उद्देश्य केवल कैंसर को शरीर से हटाना नहीं है, बल्कि महिला के ‘भविष्य’ को सुरक्षित करना है। आज चिकित्सा विज्ञान इतनी उन्नति कर चुका है कि कई मामलों में हम ‘फर्टिलिटी स्पेयरिंग सर्जरी’ (Fertility Sparing Surgery) के माध्यम से महिला की माँ बनने की क्षमता को बचा सकते हैं।
डॉ. सर्वेश गुप्ता का ‘एक्शन प्लान’
- अपने शरीर की आवाज़ सुनें : ब्लोटिंग या थकान को “काम का बोझ” कहकर न टालें। आपका शरीर आपको संकेत देता है, उसे पहचानें।
- जेनेटिक काउंसलिंग : अगर परिवार में इतिहास है, तो संकोच छोड़ें और जेनेटिक टेस्ट के बारे में परामर्श लें।
- सो कंसल्ट अर्ली (So Consult Early) : KNMH में हमने यही सिखाया है — देरी ही सबसे बड़ी बाधा है। लक्षण दिखने के पहले 15 दिन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।
मेरा विज़न :
प्रयागराज की हर महिला को यह पता होना चाहिए कि जीवन आशा क्लिनिक में हम केवल कैंसर का इलाज नहीं करते, हम ‘उम्मीद’ का इलाज करते हैं। हम यहाँ अत्याधुनिक ओंकोप्लास्टी और विशेषज्ञ परामर्श के साथ आपके साथ खड़े हैं।
डरें नहीं, जागरूक बनें। कैंसर को हराने की शक्ति आपके सही समय पर लिए गए निर्णय में है।
स्वस्थ रहें, सजग रहें।

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